Today Hind Times

डेढ़ लाख लोग जुटे जनाजे की नमाज में
टीएचटी 4 Apr 109 views THT SPECIAL

डेढ़ लाख लोग जुटे जनाजे की नमाज में

राजकीय सम्मान के साथ अमीर-ए-शरीयत मौलाना वली रहमानी को किया गया सुपुर्द-ए-खाक


टीएचटी रिपोर्टर/मुंगेर।  आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड के मासचिव व इमारत-ए- शरिया के अमीर-ए-शरीयत मौलाना वली रहमानी पार्थिव शरीर को रविवार को पुश्तैनी गांव मुंगेर के खानकाह रहमानी परिसर में राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया है। मौलाना वली रहमानी के जनाजे के नमाज में लगभग डेढ़ लाखा लोग शामिल हुए थे। अंतिम दीदार व कंधे देने के लिए हर लोग बेताव दिखे। भीड़ इस कदर था कि चलना भी मुश्किल था। वली रहमानी के निधन को हर तबके हर सामाज के लोग आपूर्णिय क्षति बताया। मौलाना वली रहमानी एक बड़े स्काॅलर थे। दिनी और दुनियाबी दोनों शिक्षा में महारथ हासिल था।


तीन अप्रैल 2021 को हुआ था इंतेकाल: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव व बिहार झारखंड, उड़ीसा व पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े एदारा इमारत-ए-शरिया के अमीर-ए-शरीयत मौलाना वली रहमानी का शनिवार यानि तीन अप्रैल 2021 को दोपहर ढाई बजे पटना के पारस हॉस्पिटल में निधन हो गया था। इनके निधन से हर समाज के लोगों में शोकाकुल थे व दुख प्रकट किया। बताया गया कि 18 मार्च को आईजीआईएमएस में एमलसी खालिद अनवर के साथ जा कर कोरोना का वैक्सीन लिए थे। इसके बाद से अमीर-ए-शरीयत बीमार पड़ गये थे। वहीं जांच में कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। जिसके बाद बेहतर इलाज को मौलाना वली रहमानी को 28 मार्च को पारस हॉस्पिटल पटना में भर्ती कराया गया था। इलाज के ही दौरान तीन अप्रैल यानि शनिवार को ढाई बजे इनका इंतेकाल हो गया। हजरत मौलाना सैयद मोहम्मद वली रहमानी का जन्म 5 जून 1943 को मुंगेर में हुआ था। अपनी शुरूआती शिक्षा मौलवी हब्बुर्ररहमान और मास्टर फजलुर्ररहमान से हासिल की थी। मास्टर फजलुर्ररहमान ने उन्हें रहमानिया उर्दू प्रायमरी स्कूल में पांचवीं तक  शिक्षा दी दिये थे। यह प्रायमरी स्कूल खनकाह-ए- रहमानी के आंगन में आज भी चल रही है। उन्होंने अपने पिता से भी शिक्षा  ली। इसके बाद जामिया नदवतुल उलमा लखनऊ और दारूल उलूम देवबंद से षिक्षा हासिल की। चार भाई बहन में बड़े भाई वसी रहमानी का निधन 25 जुलाई 2008 में हो गया था। 29 नवम्बर 2015 को इमारत-ए-शरिया के सातवें अमीर-ए-शरीयत मौलाना वली रहमानी बनाये गये थे। इससे पहले नयाब भी इमारत-ए-शरिया में रह चुके थे। सज्जादानशीं खानकाह-ए-रहमानी मुंगेर के 1991 से 3 अप्रैल 2021 तक रहे। रहमानी 30 के संस्थापक थे। विधान परिषद 1974 से 1996 तक रहे। पांच वर्ष तक विधान परिषद का अध्यक्ष भी रहे थे। हजरत मौलाना सय्यद मोहम्मद वली रहमानी साहब दामत बरकातूहुम, सय्यद खानदान के चश्मो चिराग हैं। पीराने पीर, बड़े पीर साहब हजरत सय्यद शेख अब्दुल कादिर जीलानी रहमतुल्लाह अलैह (बगदादशरीफ, इराक) की 27 वीं पुश्त में थे। हजरते वाला कुतुबे आलम हजरत मौलाना सय्यद मोहम्मद अली मुंगेरी रहमतुल्लाह अलैह के पोते एवं अमीरे शरीयत हजरत मौलाना सय्यद मोहम्मद मिन्नतुल्लाह रहमानी रहमतुल्लाह अलैह के साहबजादे (बेटे) थे।


शिक्षक से किये थे अपने कैरियर की शुरूआत: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी थे, इमारत ए शरिया बिहार, उड़ीसा, झारखंड व पश्चिम बंगाल के के अमीर ए शरीयत थे, जामिया रहमानिया के नाजिमे आला, रहमानी फाउन्डेशन के संस्थापक, रहमानी 30 के संस्थापक, दारूल उलूम नदवतुल उलमा लखनऊ के रूकन थें, तहरीके इस्लाहे मुआशरा कमेटी के कुल हिन्द कन्वेनर हैं, ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिसे मुशावरत के नायब सदर थे। अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी के कोर्ट के मेम्बर हैं, स्टैंडिंग कमेटी गवर्मेंट ऑफ इंडिया और मॉनीटरिंग कमेटी (एच.आर.डी.) के बा वकार मेम्बर थे, अन्जुमन हिमायतुल इस्लाम मुंगेर के सदर थे, मौलाना आजाद फाउन्डेशन देहली के वाइस चेयरमेन थे। इसके अलावे छोटे बड़े दो दर्जन से अधिक किताबें लिखे थे। जिसमें प्रमुख शहंषाहे कोनने के दरबार, बैअत एहदे नबवीं सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम, लड़कियों का कत्ले आम, आपकी मंजिल ये हैं, आॅक्सफोर्ड युनिवर्सिटी (लंदन) और कोलम्बो युनिवर्सिटी (श्रीलंका) से डाॅक्टर की उपाधि भी प्रदान किये थे। लखनऊ से पढ़ाई पूरी करके दारूल उलूम देवबंद गये। वहां से फारिग होकर दुनियावी तालीम हासिल करने के लिए तिलका मांझी भागलपुर युनिवर्सिटी बिहार से इतिहास में एमए की डिग्री प्राप्त की वह भी प्रथम स्थान प्राप्त किया था और युनिवर्सिटी के सारे पुराने रिकार्ड तोड़ दिये थे और मास्टर डिग्री प्राप्त की। 40 देशों की यात्रा भी कर चुके थे। इनकी बड़ी शख्सियत है, दिनी और दुनियाबी मामले के काफी जानकार थे। 1967 में वहीं पिता के कहने पर वली रहमानी ने दस वर्षों तक जामिया रहमानी में षिक्षक बन पढ़ाये। वहीं मौलाना वली रहमानी मादारिस के बच्चे, मदारिस के टीचर, ओलमाए अकराम, अपनी अलग-अलग पहचान रखते थे। इनके दो पुत्र व एक पुत्री है।

जवानी के दिन: हजरत मौलाना सैयद मोहम्मद वली रहमानी का बचपन आला अकदार के साये में गुजरा। उन्हें घर और बाहर हर तरफ शिक्षा का माहौल मिला, जिससे उनके अंदर चमक आई। हजरत ने देश में मुसलमानों के खिलाफ हवा चलते देख अस्गत, 2014 में भोपाल के पीरे तरीकत हजरत मौलाना सज्जाद साहब नोमानी दामत बरकातुहूम के साथ मिलकर ‘दीन और दस्तूर बचाओ तहरीक’ की शुरूआत की थी। इसके बाद दिन व देश बचाओ तहरीक भी चलाया गया था। लगभग 40 देशों की यात्रा की थी और पूरे हिन्दुस्तान के कोने-कोने में दीनी  सेमिनारों और मदारिस के जलसों में शिरकत भी की। कई शिक्षण संस्थान के बुनियाद भी रखें वही रांची में सीबीएसई पैटर्न पर इस्लाम की स्कूल का भी बुनियाद रखी थे। कई तहरीक चलाये। तीन तलाक जैसे मुद्दे पर भी लड़ाई लड़े। इनका हर सामाज में एक अच्छी पकड़ थी और इन्हें लाखों के तादाद चाहने बाले लोग थे।